Independence Day 2026: ‘वंदे मातरम्’ से गूंजा लाल किला, PM मोदी ने फहराया तिरंगा

On: August 15, 2026 11:40 AM
Independence Day 2026

Independence Day 2026: भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को लाल किला परिसर में इस बार का समारोह ऐतिहासिक बन गया। पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले में ‘Vande Mataram’ का सामूहिक गायन हुआ। इसके बाद राष्ट्रगान का पाठ किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय गीत की 150 वर्षों की गौरवशाली विरासत को समर्पित रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। देशभक्ति के माहौल और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में ‘Vande Mataram’ की धुन ने समारोह को खास बना दिया। आइए विस्तार से पढ़ते हैं।

लाल किले में पहली बार हुआ ‘वंदे मातरम्’ का गायन

स्वतंत्रता दिवस समारोह में मौजूद मेहमानों ने सेना के बैंड द्वारा बजाई गई ‘वंदे मातरम्’ की धुन के साथ राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान का पाठ हुआ। ध्वजारोहण के बाद तिरंगे को ‘राष्ट्रीय सलामी’ दी गई। समारोह के दौरान लाल किले की प्राचीर पर की गई पुष्प सजावट भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सजावट में बीच में तिरंगे और उसके दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था।

Independence Day 2026: हेलीकॉप्टर से हुई फूलों की बारिश

Independence Day 2026 ध्वजारोहण के बाद भारतीय वायुसेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने समारोह स्थल पर पुष्पवर्षा की। इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम्’ अंकित ध्वज लेकर उड़ान भर रहा था। इस दृश्य ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के देशभक्ति से भरे माहौल को और खास बना दिया। लाल किले से लेकर समारोह स्थल तक राष्ट्रीय गीत और तिरंगे की मौजूदगी ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप दिया।

150 साल पुराना है ‘Vande Mataram’ का इतिहास

Vande Mataram
Vande Mataram

‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। यह गीत धीरे-धीरे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज और देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। ‘वंदे मातरम्’ पहली बार 1896 में कलकत्ता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। इसके बाद यह स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को एकजुट करने वाले प्रमुख नारों में शामिल हो गया।

सरकारी जानकारी के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ का राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल पहली बार 7 अगस्त 1905 को हुआ था। इससे पहले यह गीत 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।

1950 में मिला राष्ट्रीय गीत का दर्जा

Independence Day 2026 स्वतंत्रता के बाद ‘वंदे मातरम्’ को देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष सम्मान मिला। संविधान सभा ने 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। राष्ट्रीय गीत के रूप में ‘Vande Mataram’ का महत्व केवल इसके साहित्यिक और संगीत पक्ष तक सीमित नहीं है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सरकार मना रही है ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल

भारत सरकार ने पिछले साल नवंबर में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सालभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान और इसकी विरासत को देश की नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन इसी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

‘वंदे मातरम्’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

Vande Mataram
Vande Mataram

‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह गीत उस दौर में देशवासियों के लिए प्रेरणा और एकजुटता का माध्यम बना, जब भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना से शुरू हुई यह यात्रा साहित्य से निकलकर स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बनी और बाद में देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्थापित हुई। यही वजह है कि इसके 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भारतीय इतिहास और संस्कृति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘Vande Mataram’ से जुड़े प्रमुख तथ्य

विषयजानकारी
रचनाकारबंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
रचना का वर्ष1875
पहली प्रकाशित रचना7 नवंबर 1875
साहित्यिक पत्रिकाबंगदर्शन
उपन्यासआनंदमठ
पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया1896
गायकरवींद्रनाथ टैगोर
राजनीतिक नारे के रूप में प्रयोग7 अगस्त 1905
राष्ट्रीय गीत का दर्जा1950
150वीं वर्षगांठ2025-26
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में विशेष आयोजन15 अगस्त 2026

15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान तक सीमित नहीं रहा। लाल किले में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन और इसके 150 वर्ष पुराने इतिहास को सम्मान देना इस समारोह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल रहा। 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बना और आज भी देश की राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लाल किले से इसकी गूंज ने इस ऐतिहासिक विरासत को एक बार फिर पूरे देश के सामने जीवंत कर दिया।

FAQ:

‘वंदे मातरम्’ की रचना किसने की थी?

‘वंदे मातरम्’ की रचना प्रसिद्ध लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया।

‘वंदे मातरम्’ पहली बार कब प्रकाशित हुआ था?

‘वंदे मातरम्’ पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।

‘वंदे मातरम्’ पहली बार किसने गाया था?

1896 में कलकत्ता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘वंदे मातरम्’ गाया था।

भारत का राष्ट्रीय गीत कौन सा है?

‘वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है। संविधान सभा ने 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था।

15 अगस्त 2026 को लाल किले में क्या खास हुआ?

79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किला परिसर में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन हुआ। इसके बाद राष्ट्रगान और ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष क्यों मनाए जा रहे हैं?

2025 में ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे हुए। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए सरकार ने सालभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत की।

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Aman Singh

अमन सिंह एक अनुभवी कंटेंट राइटर, ब्लॉगर और डिजिटल पब्लिशर हैं। वे Taaza Bharat के संस्थापक हैं, जहाँ ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, क्रिकेट, मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी ताज़ा एवं भरोसेमंद खबरें प्रकाशित की जाती हैं। 5 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, अमन पाठकों तक सटीक, उपयोगी और शोध-आधारित जानकारी सरल भाषा में पहुँचाने पर विशेष ध्यान देते हैं।

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